यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब समर्थित ताकतों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। ईरान समर्थित हूती संगठन ने हाल के हफ्तों में सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इनमें रियाद का किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और तेल कंपनी अरामको से जुड़े ठिकाने भी शामिल हैं।
इन हमलों के बीच हूती विद्रोहियों की सैन्य क्षमता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बढ़ी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले एक दशक में लगातार सैन्य कार्रवाई के बावजूद हूती अपनी मिसाइल, ड्रोन और समुद्री हमले की क्षमता को विकसित करने में सफल रहे हैं।
सऊदी अरब के एयरपोर्ट और तेल ठिकानों पर हमले
हाल के दिनों में हूतियों ने सऊदी अरब के रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को कई बार निशाना बनाया है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के अनुसार, अक्टूबर में एयरपोर्ट पर करीब 20 हमलों की कोशिश की गई। गठबंधन ने इन हमलों में लोगों के मारे जाने और घायल होने की जानकारी भी दी है।
हूती हमलों का निशाना केवल हवाई अड्डे नहीं हैं। तेल और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर भी हमले किए गए हैं। 14 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक, धहरान में सऊदी अरामको के एक परिसर को नुकसान पहुंचा और वहां आग लगने की जानकारी सामने आई थी।
हूतियों के पास मिसाइल और ड्रोन का बड़ा जखीरा
विशेषज्ञों के मुताबिक हूती संगठन के पास बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और लंबी दूरी तक मार करने वाले ड्रोन मौजूद हैं। संगठन ने लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाने के लिए एंटी-शिप मिसाइलों और समुद्री ड्रोन का भी इस्तेमाल किया है।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि हूतियों को ईरान और क्षेत्र में मौजूद उसके सहयोगियों से तकनीकी विशेषज्ञता और हथियारों से जुड़ी मदद मिलती रही है। हालांकि ईरान हूतियों को हथियार देने के आरोपों से इनकार करता रहा है।
2015 से कितना बदला हूती संगठन?
यमन के गृहयुद्ध में 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के हस्तक्षेप के समय हूती संगठन की ताकत आज की तुलना में काफी कम थी। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के 2024 के अनुमान में हूतियों की भर्ती क्षमता करीब 3.5 लाख लड़ाकों तक पहुंचने की बात कही गई थी, जबकि 2015 में यह संख्या लगभग 30 हजार बताई गई थी।
पर्वतीय इलाकों में मजबूत पकड़ और स्थानीय स्तर पर हथियारों के निर्माण की क्षमता ने हूतियों को लंबे संघर्ष में टिके रहने में मदद की है। कम लागत वाले ड्रोन और मिसाइलों के जरिए वे महंगे एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाते हैं।
यमन में भी बढ़ रही है जंग
सऊदी अरब पर हमलों के साथ-साथ यमन के अंदर भी लड़ाई तेज हुई है। हूती और सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बलों के बीच पश्चिमी तट और ताइज क्षेत्र के आसपास संघर्ष बढ़ा है।
ताइज और बाब अल-मंदेब क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं। बाब अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच प्रमुख समुद्री मार्ग है, इसलिए यहां किसी भी सैन्य संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर पड़ सकता है।
सऊदी अरब के लिए चुनौती क्यों बढ़ी?
सऊदी अरब के पास अमेरिका से मिले आधुनिक लड़ाकू विमान और एयर डिफेंस सिस्टम हैं, लेकिन हूतियों के अपेक्षाकृत कम लागत वाले ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। इसके अलावा सऊदी अरब का बड़ा भौगोलिक क्षेत्र और दूर-दूर फैले तेल, एयरपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण ठिकाने सुरक्षा व्यवस्था को और जटिल बनाते हैं।
सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन भी यमन में हूती ठिकानों पर जवाबी हमले कर रहा है। गठबंधन ने हाल में हूती हथियार भंडारण केंद्रों और लॉन्च साइटों को नष्ट करने का दावा किया है। दूसरी ओर हूती भी सऊदी ठिकानों पर हमले जारी रखने की धमकी दे रहे हैं।
संघर्ष का असर तेल और वैश्विक कारोबार पर
सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में शामिल है और उसके तेल एवं ऊर्जा ढांचे पर हमले का असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता। लाल सागर और बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले समुद्री व्यापार पर भी संकट का असर पड़ सकता है।
मौजूदा तनाव के कारण सऊदी अरब के निवेश, पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से जुड़े महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों पर भी सुरक्षा संबंधी सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल संघर्ष के जल्द खत्म होने के स्पष्ट संकेत नहीं हैं। हूती हमले और सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की जवाबी कार्रवाई जारी रहने से यमन और पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है।

