नई दिल्ली: केंद्र सरकार इस महीने के अंत में संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। इस संभावित विशेष सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, सत्र की अंतिम तारीख और विस्तृत कार्यक्रम अभी तय होना बाकी है।
सूत्रों के मुताबिक सरकार को लोकसभा में प्रस्तावित विधेयकों को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त संख्या होने का भरोसा है। इसके साथ ही सरकार कुछ विपक्षी दलों और छोटे दलों से समर्थन को लेकर बातचीत भी कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार डीएमके के साथ भी संपर्क किया जा रहा है।

विशेष सत्र क्यों चर्चा में है?

इस साल अप्रैल में संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को लेकर सरकार को झटका लगा था। संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका था। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक इसके बाद इससे जुड़े दो अन्य विधेयकों पर आगे की कार्यवाही नहीं हुई।
अब सरकार इन्हीं मुद्दों को दोबारा संसद के सामने लाने की तैयारी में है। प्रस्तावित बदलावों का संबंध लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण तथा परिसीमन की प्रक्रिया से है।

महिला आरक्षण और परिसीमन का क्या संबंध है?

2023 में संसद ने महिलाओं के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने वाला कानून पारित किया था। इसके लागू होने की प्रक्रिया परिसीमन और संबंधित संवैधानिक प्रावधानों से जुड़ी हुई है।
इस साल अप्रैल में पेश किए गए प्रस्तावों में परिसीमन के जरिए लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों के पुनर्निर्धारण तथा महिला आरक्षण को लागू करने का रास्ता तैयार करने की कोशिश की गई थी। उस समय संविधान संशोधन विधेयक आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका।

सरकार विपक्षी दलों से क्यों कर रही है बातचीत?

रिपोर्टों के अनुसार केंद्र सरकार अपनी संख्या को मजबूत करने के लिए कुछ विपक्षी और छोटे दलों से संपर्क कर रही है। डीएमके के साथ बातचीत भी इसी रणनीति का हिस्सा बताई जा रही है। हालांकि, इन बातचीत का अंतिम परिणाम और संबंधित दलों का रुख आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं हुआ है।
संविधान संशोधन विधेयक के लिए संसद में विशेष बहुमत की जरूरत होती है। अप्रैल में पेश विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाया था।

BRICS संसदीय मंच को ध्यान में रखकर तय हो सकता है कार्यक्रम

सूत्रों के मुताबिक विशेष सत्र के कार्यक्रम को 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में होने वाले 12वें BRICS संसदीय मंच को ध्यान में रखकर तय किया जा सकता है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि विशेष बैठक बुलाने से पहले सांसदों को लगभग एक सप्ताह का नोटिस दिया जा सकता है।

विपक्ष की SIR को लेकर सरकार पर घेराबंदी

विशेष सत्र की संभावित तैयारी ऐसे समय हो रही है जब विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है।
ऐसे राजनीतिक माहौल में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को दोबारा संसद में लाने की संभावित तैयारी आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच एक अहम राजनीतिक मुद्दा बन सकती है।
फिलहाल महत्वपूर्ण बात यह है कि विशेष सत्र की तैयारी की खबर सामने आई है, लेकिन अंतिम तारीख और विधेयकों के सदन में पेश होने का आधिकारिक कार्यक्रम अभी सामने नहीं आया है।